धर्म

Chhattisgarh का ऐसा मंदिर जहाँ भूलकर भी नहीं रह सकते भाई-बहन साथ !!

जहां भाई-बहनों का एक साथ प्रवेश करना मना है। यह मंदिर छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के कसडोल के पास नारायणपुर नामक गांव में स्थि

PUBLISHED BY- LISHA DHIGE

Bhai Dooj 2022 ।। भाई-बहन का रिश्ता बेहद पवित्र होता है। बचपन में भाई-बहन भले ही साथ रहते हुए लड़ते-झगड़ते रहते हों लेकिन दोनों के बीच यह अटूट प्यार हमेशा बना रहता है। इसी प्यार को दिखाने के लिए भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को टीका लगाकर उनकी सलामती की दुआ करती हैं और भाई भी बहन की हमेशा रक्षा करने का वादा करता है। भाई दूज के मौके पर हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां भाई-बहनों का एक साथ प्रवेश करना मना है। यह मंदिर छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के कसडोल के पास नारायणपुर नामक गांव में स्थित है। इसे नारायणपुर के शिव मंदिर के रूप में जाना जाता है। तो आइए जानते हैं इस अनोखे मंदिर के बारे में।

photo-@socialmedia

The relation of brother and sister is very sacred. In childhood, brothers and sisters may fight and fight while living together, but this unbreakable love between the two always remains. To show this love, the festival of Bhai Dooj is celebrated. On this day sisters pray for their well being by vaccinating their brothers.And the brother also promises to protect the sister always. On the occasion of Bhai Dooj, we are telling you about a temple where brothers and sisters are not allowed to enter together. This temple is located in a village named Narayanpur near Kasdol of Balodabazar, Chhattisgarh. It is known as the Shiva temple of Narayanpur. So let’s know about this unique temple.

यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण रात के समय किया गया था। मंदिर को पूरी तरह बनने में 6 महीने का समय लगा था। इस मंदिर के बारे में एक दिलचस्प बात बहुत लोकप्रिय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली मंदिर की मुखिया शिल्पी नारायण रात में नग्न होकर मंदिर का निर्माण करती थीं।

People living here say that this temple was constructed during the night. It took 6 months to complete the temple. One interesting thing about this temple is very popular. Local people say that Shilpi Narayan, the head of the temple belonging to the tribal community, used to build the temple naked at nigh.

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यह भारत का एकमात्र मंदिर है जहां भाई-बहनों का एक साथ जाना प्रतिबंधित है। इसके पीछे भी एक कहानी है। निर्माण स्थल पर शिल्पी नारायण की पत्नी उनके लिए खाना लेकर जाया करती थीं। लेकिन एक दिन नारायण की बहन ने उनकी पत्नी के स्थान पर भोजन ग्रहण कर लिया। उसे देखकर नारन को शर्मिंदगी महसूस हुई और उसने मंदिर के ऊपर से कूदकर अपनी जान दे दी

This is the only temple in India where the visit of brothers and sisters together is prohibited. There is a story behind this too. Shilpi Narayan’s wife used to take food for him at the construction site. But one day Narayan’s sister took food in place of his wife. Seeing her, Naran felt embarrassed and committed suicide by jumping from the top of the temple.

छत्तीसगढ़ का यह प्राचीन शिव मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। आप भी सोच रहे होंगे कि इस मंदिर में भाई-बहन का एक साथ जाना मना क्यों है। इसका मुख्य कारण वहां की दीवारों पर खुदी हुई हस्तमैथुन की मूर्तियां हैं।

This ancient Shiva temple of Chhattisgarh is famous for its architecture. You must also be thinking that why it is forbidden for brothers and sisters to go together in this temple. The main reason for this is the sculptures of masturbation carved on the walls there.

7वीं शताब्दी में हुआ था मंदिर का निर्माण

यह मंदिर 7वीं से 8वीं शताब्दी के बीच का बताया जाता है। मंदिर का निर्माण लाल और काले बलुआ पत्थर से किया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कलचुरी शासकों ने करवाया था। इस मंदिर के खंभों पर कई खूबसूरत आकृतियां हैं। पत्थर की नक्काशी देखने लायक है। इस मंदिर की कारीगरी को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं।

This temple is said to be between 7th to 8th century. The temple is constructed with red and black sandstone. According to the local people, this temple was built by the Kalchuri rulers. There are many beautiful figures on the pillars of this temple. The stone carvings are worth seeing. People come not only from the country but also from abroad to see the workmanship of this temple.

16 स्‍तंभाें पर टिका है मंदिर

यह मंदिर 16 खंभों पर टिका है। हर स्तम्भ पर सुन्दर नक्काशी की गई है। मंदिर के पास एक छोटा सा संग्रहालय है, जहां आसपास से खोदी गई मूर्तियों को रखा गया है। यहां एक बड़ी मूर्ति है। कहा जाता है कि किसके बारे में यह वही राजा है, जिसके द्वारा मंदिर बनाया गया है।

This temple rests on 16 pillars. Beautiful carvings have been done on each pillar. There is a small museum near the temple, where the idols excavated from the surroundings are kept. There is a big statue here. It is said that about whom this is the same king, by whom the temple is built.

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