भाषा, पत्रकारिता की समझ और समाचार लेखन में दक्षता के लिए प्रिंट मीडिया का अनुभव आवश्यक

प्रख्यात कवि श्री कुमार विश्वास ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि जब-जब देश को आवश्यकता हुई, युवा पीढ़ी ने देश की बेहतरी के लिए संघर्ष किया। उन्होंने चाणक्य की सम्प्रेषण कला का उल्लेख करते हुए कहा कि सामान्य नागरिक, सामान्य हितचिंतक और परस्पर संस्कृतियों का सम्मान करते हुए किया गया सम्प्रेषण सर्वाधिक प्रभावी और ग्राह्य होता है। उन्होंने हनुमानजी और अंगद को सम्प्रेषण कला का विशेषज्ञ बताया। राष्ट्रीय समरसता के सांस्कृतिक पृष्ठ को गढ़ने वाले आचार्य, दादा माखनलाल चतुर्वेदी के नाम से स्थापित यह विश्वविद्यालय, सम्प्रेषण विधा की शिक्षा में इस भूमिका का श्रेष्ठतम स्वरूप में निर्वहन कर रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने लक्ष्य के संबंध में स्पष्टता रखें, अपनी विधा में दक्ष हों और तटस्थता तथा ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने सोशल मीडिया के दौर में विश्वसनीयता के संकट का जिक्र करते हुए कहा कि युवा पत्रकारों को अपनी भाषा, पत्रकारिता की समझ और समाचार लेखन में दक्षता प्राप्त करने के लिए कम से कम तीन साल प्रिंट मीडिया में अवश्य कार्य करना चाहिए। श्री विश्वास ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विश्वविद्यालयों में कुलपति को कुलगुरू का संबोधन प्रदान करने की पहल की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने अभ्युदय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं तथा आरंभ किए गए नवाचारों की जानकारी दी। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, विधायक श्री उमाकांत शर्मा सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।