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श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने पीएम हाउस को कर दिया आग के हवाले, राष्ट्रपति देंगे इस्तीफा

श्रीलंका | (Economic Crisis in Sri Lanka) आर्थिक संकट के बीच महीनों के विरोध प्रदर्शन के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति Gotabaya Rajapksa अगले बुधवार को इस्तीफा देंगे. वहीँ श्रीलंका लोक सभा स्पीकर 30 दिनों के लिए राष्ट्रपति बनेंगे, साथ ही इस दौरान संसद एक नए नेता का चयन करेगी.

श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के कोलंबो स्थित घर को आज प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया. श्रीलंका के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा की “प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के निजी आवास में तोड़फोड़ की और फिर वहां आग लगा दी.”

(Economic Crisis in Sri Lanka) वहीँ पुलिस और प्रशासन टीम द्वारा टियर गैस फेकने पर भी प्रदर्शनकारी नहीं रुके और प्रधानमंत्री आवास में घुस गए. वहां उन्हें पीएम के वाहनों को नुकसान पहुंचाते देखा गया.

रानिल विक्रमसिंघे को पीएम के रूप में मई में नियुक्त किया गया था. मगर उन्होंने सरकार की निरंतरता और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने पद से इस्तीफे की घोषणा की है.

उन्होंने ट्वीट किया, “सभी नागरिकों की सुरक्षा सहित सरकार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, मैं आज पार्टी नेताओं की सर्वदलीय सरकार के लिए रास्ता बनाने की सबसे अच्छी सिफारिश को स्वीकार करता हूं. इसे सुगम बनाने के लिए मैं प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दूंगा.”

प्रदर्शनकारियों के पहुँचने से पहले राष्ट्रपति Gotabaya Rajapksa अपने आधिकारिक आवास छोड़ दिया. इस अराजकता के बीच, श्रीलंकाई नौसेना के जहाज पर सूटकेस लोड किए जाने के वीडियो सामने आया था. स्थानीय मीडिया का दावा है कि सूटकेस राष्ट्रपति राजपक्षे के थे.

राष्ट्रपति भवन के फाटकों में सेंध लगाने के बाद, सोशल मीडिया पर एक लाइव प्रसारण में सैकड़ों लोगों को इसके कमरों से घूमते हुए देखा जा सकता है, जिनमें से कुछ उग्र भीड़ परिसर के पूल में कूद रहे हैं.

(Economic Crisis in Sri Lanka) 22 मिलियन लोगों का देश एक गंभीर विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहा है, जिसने ईंधन, भोजन और दवा के आवश्यक आयात को सीमित कर दिया है, जिससे यह सात दशकों में अपनी सबसे खराब वित्तीय उथल-पुथल में डूब गया है.

कई लोग देश के पतन के लिए राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को जिम्मेदार ठहराते हैं. मार्च के बाद से बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों ने उनके इस्तीफे की मांग की है.

वहीँ इस आर्थिक संकट के चलते देश ने ईंधन शिपमेंट प्राप्त करना बंद कर दिया है, स्कूलों को आवश्यक सेवाओं के लिए पेट्रोल और डीजल को बंद करने और राशन देने के लिए मजबूर किया है.

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